किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति।
किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति।
क्यों इतना शोर है आज!
एक रेप ही तो हुआ है।जो रोज़ होता है।कभी छुप के और कभी छुपा करके। किस बात का विरोध कर रहे हो आप सब। आप सभी शामिल हो इस घटना में। कार्यस्थल, घरों में, बाज़ार में सभी जगह हो रहा है रेप। बस वो नग्न अवस्था मे नही होता है। ये गलत है वो सही है। इसी बीच मे दब के रह जाती है कुछ आवाजें। हमारे शिक्षित समाज का दोष है। जो जनता समझती तो सब कुछ है। पर तथाकथित समाज का विरोध नही कर सकती। मुझे शर्म आती है । यह समाज के विद्वान नकाबपोश लोग जो स्त्री के इज्ज़त की बात करते हैं। असल मे वह ऐसे अवसरों का लाभ उठाते है। यह सिर्फ मामला दस दिन का आक्रोश मात्र है। काश ये समाज के सुधार तक का सफर होता।
अरे! हम हिन्दू मुसलमान से पहले एक स्त्री एक माँ और एक बहन भी है। 
महारष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कॉर्ट भी खुला रहेगा, संसद भी,सरकार भी। किसी को नीद नही आती। होटल बदलते रहे। मगर जब आम जनता के समस्यओं का मामला आएगा तो कचरी 20 साल चलेगा तब न्याय मिलेगा।
वाह रे न्यायपालिका और हमारे विद्वान न्यायधीश आपकी मिहिमा आप ही जाने।
No social security.
Boycott#Indian#Judiciary
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